राज्य मानसिक चिकित्सालय में स्टाफ की नियुक्ति में देरी पर हाईकोर्ट की कार्रवाई, मुख्य सचिव से जवाब मांगा गया

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बिलासपुर. राज्य मानसिक चिकित्सालय में मनोरोग चिकित्सक सहित अन्य स्टाफ की नियुक्ति को लेकर कई बार निर्देश देने के बावजूद देरी को लेकर हाइकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। इस पूरे मामले में मुख्य सचिव से जवाब पेश करने कहा गया है। मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2025 को तय की गई है।

प्रदेश के एकमात्र मानसिक चिकित्सालय में चिकित्सकों व स्टाफ की कमी को लेकर एक अन्य जनहित याचिका दायर की है। वहीं इस मामले में दायर दो याचिकाओं की सुनवाई हाईकोर्ट के डिवीजन बेंच में एक साथ चल रही है। बीते सुनवाई के दौरान राज्य शासन ने डिवीजन बेंच के समक्ष जवाब पेश किया था। इसमें जानकारी दी थी कि मानसिक रोगी चिकित्सालय में बिस्तरों की संख्या बढ़ाकर 200 की जा रही है। इसके लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी भी दूर करने का निर्णय लिया गया है।

राज्य शासन की ओर से पैरवी करते हुए महाधिवक्ता कार्यालय के विधि अधिकारियों ने डिवीजन बेंच को जानकारी दी थी कि विशेषज्ञ चिकित्सकों के अलावा स्टाफ की भर्ती प्रक्रिया जल्द प्रारंभ की जाएगी। गुरुवार को हुई सुनवाई में राज्य शासन के अलावा राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने भी अपने अधिवक्ता के माध्यम से कोर्ट के समक्ष जवाब पेश किया। दोनों ही पक्षों से जवाब आने के बाद डिवीजन बेंच ने अगली सुनवाई के लिए 8 अप्रैल का समय तय कर दिया है।

अब तक भर्ती प्रक्रिया पूरी होने की जानकारी पेश नहीं

बता दें कि 22 अगस्त 2024 के आदेश के अनुपालन में मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन का शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया था, जिसमें बताया गया था कि राज्य मानसिक चिकित्सालय सेंदरी में नियुक्ति सहित राज्यभर में वर्ग-III एवं IV के 650 पदों पर नियुक्ति की जानी है। राज्य अधिवक्ता ने कहा था कि भर्ती प्रक्रिया अभी भी प्रगति पर है, लेकिन लगातार हो रही सुनवाई में अब तक इस प्रक्रिया को पूरी होने की जानकारी पेश नहीं की है। इस पर बेंच ने इस पूरे मामले में राज्य शासन के मुख्य सचिव से शपथ पत्र के माध्यम से जवाब पेश करने का आदेश दिया है और अगली सुनवाई 8 अप्रैल 2025 को तय की है।

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