रायपुर, 25 मई 2021/ उम्मीद पर ही दुनिया टिकी है। जीवन मंे आशा और निराशा दोनों होते हैं और हर इंसान के भीतर आशा और निराशा के बीच द्वंद चलता रहता है, इस दौरान हमारी सकारात्मक सोच ही होती है जो हमें उलझनों के बीच आशाओं की नई किरण दिखाती है। हमारी उम्मीद हमें मुश्किल परिस्थितियों से उबार देती है। 100 साल की वृद्धा बुधनी बाई आज हम सबके लिए प्रेरणा का स्रोत है। अपने आत्म विश्वास से उन्होंने कोरोना को न सिर्फ हराया हैै। सौ साल की उम्र में बीमारी से लड़कर सबकों धैर्य के साथ जीने का रास्ता भी बताया है।
कोरिया जिले के विकासखंड मनेन्द्रगढ़ के ग्राम बुंदेली की रहने वाली 100 साल की बुधनी बाई को जब उन्हे अस्पताल लाया गया तो ऑक्सीजन लेबल 95 से कम था। उन्हें बुखार था एवं कोरोना के अन्य लक्षण भी थे। अस्पताल में उन्होंने बिल्कुल भी तनाव नहीं लिया और कोविड गाइडलाइन का पालन करते हुए दवाइयां ली। यहां डॉक्टरों के परामर्श और नर्सिंग स्टाफ के नियमित संपर्क ने उनका हौसला बढ़ाया। डॉक्टरों, स्टाफ नर्स व अन्य कर्मियों की मेहनत से बुधनी बाई की सेहत सुधरती गई और महज 6 दिनों में ही वह पूरी तरह से स्वस्थ हो गई। कोविड अस्पताल में 100 साल की बुधनी बाई को स्वस्थ पाकर मेडिकल स्टाफ भी बहुत खुश था। उनके डिस्चार्ज के समय अस्पताल की पूरी टीम वहां मौजूद रही और उनके हौसले को सलाम किया। कलेक्टर ने बुधनी बाई की जिजीविषा और मेडिकल टीम की मेहनत को सराहा और इसी तरह बेहतर कार्य करने हेतु प्रोत्साहित किया। स्वस्थ होकर घर लौटी बुधनी बाई ने सभी डॉक्टरों, स्टाफ नर्स व अन्य कर्मियों को देखभाल और समुचित इलाज के लिए आर्शीवाद देते हुए धन्यवाद भी दिया।