सरकार ने शुरू की हैं महिला सशक्तिकरण के लिये कई योजनायें

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केंद्र सरकार ने पिछले नौ वर्षों में बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, तीन तलाक पर रोक और नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित करवाकर महिलाओं को सशक्त बनाने और उनके उत्थान में अपना महत्वपूर्ण योगदान
दिया है।
नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के पारित होने से लोक सभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में कुल सीटों में से एक-तिहाई सीटें महिलाओं के लिये आरक्षित होना उनके लिये एक बड़ी उपलब्धि है।
लैंगिक सशक्तिकरण की दिशा में ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ (बीबीबीपी) की योजना के माध्यम से सरकार ने लैंगिक भेदभाव से निपटने और बालिकाओं के मूल्य को बढ़ावा देने के लिये महत्वपूर्ण जन लामबंदी पैदा की है। इस योजना ने सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से बालिकाओं के अधिकारों के बारे में जागरूकता बढ़ाने का काम किया है।
इस योजना के आने के बाद से माध्यमिक शिक्षा में बालिकाओं का नामांकन 2014-15 में 75.51 प्रतिशत से बढ़कर 2020-21 में 79.46 प्रतिशत हो गया है, जो महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है।
महिला सशक्तिकरण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर निर्भर है, यही कारण है कि सरकार ने स्टैंड-अप जैसी पहल के माध्यम से महिलाओं के बीच वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने के लिये कदम उठाये हैं।
भारत की विकास यात्रा यहां की महिलाओं के सशक्तिकरण से गहराई से जुड़ी हुई है।
महिलाओं के वास्ते सुरक्षित आवास के लिये सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना – ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) की शुरुआत की।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 72 प्रतिशत से अधिक घर या तो पूरी तरह से या संयुक्त रूप
से महिलाओं के स्वामित्व में हैं। महिलाओं को घरों का स्वामित्व प्रदान करके, पीएमएवाई-जी ने उनकी आकांक्षाओं को पूरा किया है और उन्हें घरेलू निर्णय लेने में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिये सशक्त बनाया है।
महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिये प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) मई 2016 में शुरू की गयी थी, जिसके अंतर्गत ग्रामीण और वंचित परिवारों की महिलाओं को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन (एलपीजी) प्रदान किया जाता है। पीएमयूवाई के तहत 10 करोड़ से अधिक एलपीजी कनेक्शनों के वितरण ने लाखों महिलाओं के स्वास्थ्य की रक्षा की है।

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